चाँदनी रात में व्हाइट हाउस: वाल्ट ह्विटमैन

चाँदनी रात में व्हाइट हाउस

By वाल्ट ह्विटमैन

कितना सुहावना मौसम है। कभी-कभी रात में, चाँदनी में काफी देर तक विचरण करता रहता हूँ। आज की रात मैंने राष्ट्रपति निवास पर एक दीर्घ दृष्टि डाली। वह प्रासाद तुल्य धवल धौत भवन, ऊंचे गोलाकार स्तम्भ, नितांत निरभ्र, सुच्चिकण प्राचीरें और स्निग्ध ज्योत्सना निष्प्रभ संगमरमर पर प्रवाहित होती हुई और विचित्र धुंधले बिम्ब (परछाइयाँ नहीं) उत्पन्न करती हुई सी। सर्वत्र एक स्निग्ध पारदर्शी नीलाभ चंद्रिका, शुभ्र और प्रचुर गैस की रोशनियां विभिन्न कक्षों, प्राचीरों और मेहराबों पर वायु के साथ हिलोरें खाती हुई। हर एक वस्तु ऐसी शुभ्र-श्वेत, संगमरमर सी शुद्ध और आँखों में चकाचौंध करने वाली, फिर भी अति तरल और सस्मित। भावी कविताओं के स्वप्नों और नाटकों का व्हाइट हाउस उस स्निग्ध और अनुपम चंद्रिका में बहती हुई चाँदनी की धारा में तरुओं के मध्य! उसका जगमगाता हुआ अग्र भाग वास्तविक और छलना से घिरा हुआ। वृक्षों की आकृतियाँ और उनकी शाखाओं के मोड़ और गोलाइयां! तारों और आसमान की छाया में धरती का व्हाइट हाउस! सौन्दर्य का व्हाइट हाउस! रात को जिसके द्वारों पर शांत भाव से चलते हुए, नीले ओवरकोट पहने हुए द्वारपाल जो तुम्हें रोकते नहीं बल्कि जिस ओर भी तुम जाते हो, तीक्ष्ण दृष्टि से तुम्हारी ओर देखते हैं।

अनुवाद: मनोहर प्रभाकर

लिंकन के जमाने की तस्वीर

मूल अंग्रेजी में:

The White House by Moonlight

By Walt Whitman

A SPELL of fine soft weather. I wander about a good deal, sometimes at night under the moon. To-night took a long look at the President’s house. The white portico—the palace-like, tall, round columns, spotless as snow—the walls also—the tender and soft moonlight, flooding the pale marble, and making peculiar faint languishing shades, not shadows—everywhere a soft transparent hazy, thin, blue moon-lace, hanging in the air—the brilliant and extra-plentiful clusters of gas, on and around the facade, columns, portico, &c.—everything so white, so marbly pure and dazzling, yet soft—the White House of future poems, and of dreams and dramas, there in the soft and copious moon—the gorgeous front, in the trees, under the lustrous flooding moon, full of reality, full of illusion—the forms of the trees, leafless, silent, in trunk and myriad-angles of branches, under the stars and sky—the White House of the land, and of beauty and night—sentries at the gates, and by the portico, silent, pacing there in blue overcoats—stopping you not at all, but eyeing you with sharp eyes, whichever way you move.

Source: Specimen Days

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