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चेतावनी और प्रश्नपत्र : निकानोर पार्रा

नेरुदा एक कवि के रूप में  स्थापित हो चुके थे और मेधा से लैस भी थे, तभी उन्हें भान हुआ कि पाठक-श्रोता के रूप में उन्हें एक बड़ी जनता मिल सकती है, इसलिए वे कम्युनिस्ट हो गए. कम्युनिस्ट तो वे हो गए लेकिन उनसे कविता छूट गयी, इसके बावजूद वे देश-दुनिया में लोकप्रिय हो उठे. उन्होंने वही किया, जो वे चाहते थे. किन्तु मैं कहना चाहता हूँ कि बाज़ मक्खियों से नहीं लड़ता है. अपनी प्रसिद्धि के चरम पर जब बाज़ मक्खियों के साथ नाचना शुरू कर दे तो वह विदूषक बन जाता है. वे स्पीलबर्ग जैसे बड़े व्यापारी बन गए! सिनेमा के एक व्यक्तित्व के रूप में स्पीलबर्ग बड़े ही प्रतिभावान आदमी थे, लेकिन क्या हुआ? बहुत, बहुत बड़ा व्यापार. अब वह एक बाज़ है जो मक्खियों के साथ नाचता है.

अब निकानोर पार्रा मेरा मास्टर है. जब नेरुदा एक बड़े कवि और एक रोमांटिक कम्युनिस्ट थे, तब वह एक अकवि (एंटी पोएट्री) था. लोगों को उसने सच्ची कविताओं से वाबस्ता कराया, वह सचमुच में एक मजेदार आदमी था. वह मेरा मास्टर था, मैं उसे एक कवि की तरह प्यार देता था. जब मैं ‘एंडलेस पोएट्री’ शूट कर रहा था तब वे सौ साल के हो चुके थे. मैं उनसे मिलने गया, वे सौ साल के हैं, सौ साल के. प्रखर मेधा से लैस आज भी वे जिंदा हैं, और हमेशा की तरह कुछ कठिनाइयों के बीच अपना काम कर रहे हैं. वे एक इंसान हैं, निपट इंसान, जिनसे मैंने बात की है. अपनी फिल्म में मैंने खुद भी सौ साल के एक बुड्ढे की भूमिका की है. मैं उन्हें देखने गया और कहा, “एक सौ साल का आदमी मुझसे क्या कहना चाहेगा?” वे बोले, “बूढ़ा होना कोई अपमान नहीं हैं. तुम अपने पैसे खोते हो, अपनी यौवन-महिमा के गुणगान से निजात पाते हो; धन-यौन-लिप्सा से मुक्त हो जाते हो. इस तरह तुम सबकुछ खोकर फतिंगे में तब्दील हो जाते हो.”   # अलेखान्द्रो  जोदरोवस्की

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Snap Shot – Persona (1966)

 

चेतावनी

By निकानोर पार्रा

अगले आदेश तक 

आग लगने पर

लिफ्ट का नहीं

सीढ़ियों का इस्तेमाल करें

अगले आदेश तक

ट्रेन में धुम्रपान न करें
गंदगी न फैलाएं

शौच न करें

रेडियो न सुनें

अगले आदेश तक

हर उपयोग के बाद

टॉयलेट को फ्लश करें

ट्रेन जब प्लेटफ़ॉर्म पर हो

तब शौच न करें

बगल के सहयात्री से लेकर

धार्मिक सैनिकों तक के प्रति अपनी राय रखें

जैसे, दुनिया के मजदूरों एक हो,

हमारे पास खोने को कुछ नहीं है (धत्)

हमारा जीवन तो परम पिता परमेश्वर, ईसा मसीह
और पवित्र आत्मा का महिमागान है आदि

अगले आदेश तक

इंसान एक रचयिता की संपन्न कृति है (धत्),

इंसानों के कुछ अपरिहार्य अधिकार हैं

उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

जीने की आज़ादी और खुश रहने के तरीके की खोज

वैसे ही जैसे दो जोड़ दो चार होता है

यह अंतिम है लेकिन कम नहीं

इन सच्चाइयों को वैसे भी

हम हमेशा से स्वयंसिद्ध मानते आये हैं

 

प्रश्नपत्र

अकवि क्या है:

वह, जो ताबूत और अस्थि-कलश की दलाली करता है?

एक जनरल, जो खुद के बारे में ही निश्चित नहीं है?

एक पादरी, जिसे किसी चीज पर  आस्था नहीं है?

एक सैलानी, जिसके लिए हर चीज अजीब है; वृद्धावस्था और मृत्यु भी?

एक वक्ता, जिस पर आप विश्वास नहीं कर सकते?

खड़ी-चट्टान की कोर पर खड़ी एक नर्तकी ?

एक आत्ममुग्ध, जो हर किसी से प्यार करता है?

एक जोकर, जो गाल बजाता है

और बेवज़ह यूँ ही बुरा बनता है ?

एक कवि जो कुर्सी पर सोता है?

आधुनिक समय का एक कीमियागर?

एक आरामतलब क्रांतिकारी?

एक पेटी-बुर्जुआ?

एक जालसाज?

एक ईश्वर?

एक मासूम?

सैंटियागो, चिली का एक किसान?

सही उत्तर को रेखांकित करें.

अकविता क्या है:

चाय की प्याली में एक तूफ़ान?

चट्टान पर बर्फ का एक धब्बा?

मानव-मल से ऊपर तक भरा एक पतीला,

जैसा कि फादर साल्वेतियेरा मानता है?

एक आइना, जो झूठ नहीं बोलता?

लेखक-संगठन के अध्यक्ष के गाल पर पड़ा एक तमाचा?

(ईश्वर उनके आत्मा की रक्षा करे!)

युवा कवियों को एक चेतावनी?

जेट-चालित एक ताबूत?

एक ताबूत, जो वायुमंडलीय दायरे से बाहर परिक्रमा करता है?

एक ताबूत, जो कि केरोसिन से चलता है?

एक शवदाह-गृह, जहाँ कोई शव नहीं है?

सही उत्तर के सामने X चिन्हित करें.

उदय शंकर द्वारा अनुदित ये कवितायें  क्रमशः मिलर विलियम्स और  टी विग्नेसन  के अंग्रेजी  अनुवाद पर आधृत हैं.

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