गंदगी से लाचार लिबास एवं अन्य कवितायें: रॉबर्तो बोलान्यो

“सत्तर के शुरू की बात है शायद। मेक्सिको शहर में, या शायद कोई और लातिन अमेरिकी शहर रहा होगा, एक कवि सम्मलेन हो रहा था. कवि आते जा रहे थे, कविता कभी निलंबित, कभी ज़लील  होती जा रही थी. तमाशे के आदी लोग, जो कुछ सुनाई दे रहा था उसे कविता जान खुश थे.  अचानक सभा में एक बरगलाया सा लौंडा ऐसे घुसा मानो अभी अपने बस्ते से बन्दूक निकाल सब कवियों का मुँह वन्स एंड फॉर आल बंद कर देगा। जैसे ही लौंडे ने हाथ बस्ते में डाला चूहों और कवियों में फर्क में करना कठिन हो गया. थैंकफुल्ली चूहे मौका देख फरार हो गए. लौंडे की आँखों में खून था — कुछ नशे के कारण कुछ नींद के.  उसने बस्ते में हाथ डाला और एक कागज़ का परचा निकाल उसे से जोर जोर से पढ़ने लगा. लौंडा कवि निकला। चीख चीख कर लौंडा जिसे पढ़ रहा था वह उसकी कविता नहीं, बल्कि भविष्य की  उसकी कविताओं का घोषणापत्र था. लौंडा पढ़ता रहा, लोग सुनते रहे. फिर अंतरिक्ष के किसी दूर कोने से आये धूमकेतु की तरह अपना प्रकाश बाँट लौंडा अंतर्ध्यान हो गया. वह लौंडा बोलान्यो था. ” मयंक तिवारी की कही इन्हीं पंक्तियों के साथ लीजिये प्रस्तुत है  उदय शंकर द्वारा अनुदित रॉबर्तो  बोलान्यो की  तीन  कवितायें .

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Snap Shot- Endless Poetry (2016)

By रॉबर्तो  बोलान्यो

लिजा उवाच

मेरी दुनिया वहीं,

टेप्याक के पुराने गोदाम वाले टेलीफोन बूथ में

ख़त्म हो गई,

जब लिजा ने बताया कि वह किसी और के साथ सोयी.

लंबे बाल और बड़े लंड वाला वह दुबला-पतला लौंडा

उसे चोदने के लिए एक और डेट की भी मोहलत नहीं ले सका.

उसने बताया कि इसमें इतना गंभीर होने वाली बात कुछ भी नहीं है, लेकिन

तुझे अपने जीवन से निकालने के लिए इससे बेहतर कोई और उपाय भी नहीं है.

पारमेनीडेस गार्सिया साल्दाना लंबे बाल रखता था

उसमें लिजा के प्रेमी होने की संभावनाएं थीं

सालों बाद पता चला कि वह एक पागलखाने में मर गया

या खुद से ही खुद को मार डाला.

लिजा अब किसी भी गांडू के साथ सोना नहीं चाहती थी.

कभी-कभी वह सपने में आती है

और मैं देखता हूँ कि

लवक्राफ्टियन मैक्सिको में

वह खुश और शांत है.

हमने संगीत सुना (टैंड हीट, जो कि पारमेनीडेस गार्सिया साल्दाना का प्रिय बैंड था)

और तीन बार सम्भोग किया.

पहली बार वह मेरे भीतर उतर आया

फिर मुँह में

और तीसरी बार पानी के धागे से बंधी बंसी की तरह

मेरी छातियों के बीच फंस गया.

यह सब हुआ सिर्फ दो घंटों में, लिजा ने कहा.

मेरी जिन्दगी के बदतरीन दो घंटे,

मैंने फ़ोन के दूसरी छोर से कहा.

लिजा की याद

रात के अंधेरों से छनती

लिजा की यादें फिर से झरती हैं.

एक जंजीर, उम्मीद की एक किरण:

मैक्सिको का एक आदर्श गाँव,

बर्बरता के समक्ष लिजा की मुस्कान,

लिजा की एक स्थिर तस्वीर,

लिजा के खुले फ्रिज से एक धुंधली रौशनी

बेतरतीब कमरे में झड़ रही है,

जब कि मैं चालीस का हो रहा हूँ,

वह बरबस चिल्लाती है

मैक्सिको फ़ोन करो, शहर मैक्सिको फ़ोन करो,

अराजकता और सौंदर्य के बीच बड़बड़ाते

अपनी  एक मात्र सच्ची प्रेमिका से बात करने के लिए

फ़ोन बूथ के चक्कर लगाने वाले

रॉबर्टो बोलानो को फ़ोन करो.

गंदगी से भरपूर लाचार लिबास

कुत्तागिरी के दिनों में,

मेरी आत्मा मेरे दिल से पसीज गयी.

तबाह, लेकिन जीवित,

गंदगी से भरपूर लाचार लिबास,

फिर भी, प्यार से भरपूर.

कुत्तागिरी, जहाँ कोई भी अपनी

उपस्थिति दर्ज कराना नहीं चाहता.

जब कवि कुछ भी करने लायक नहीं रह जाते हैं

तब कुत्तागिरी की उपस्थिति-पंजि में

सिर्फ उनके ही नाम अंकित होते हैं.

लेकिन मेरे लिए अभी भी बहुत कुछ करना शेष था!

फिर भी, उजाड़ गाँवों से गुजरते हुए

मैं वहां गया,

लाल चींटियों, और तो और काली चींटियों द्वारा

अपनी मृत्यु के लिए अभिशप्त:

यह डर बढ़ता ही गया,

जब तक कि उसने तारों को चूम नहीं लिया.

मैक्सिको में पढ़ा एक चिलीयन

कुछ भी झेल सकता है,

मेरी समझ से यह सच नहीं है.

रात के अंधेरों में मेरा हृदय विलाप किया करता था.

एक रूहानी नदी तपते होठों को गुनगुनाती थी,

बाद में पता चला कि वह मैं था-

रूहानी नदी, रूहानी नदी,

इस बुद्धत्त्व ने इन उजाड़ गाँवों के किनारों से

खुद को एकमेक कर लिया.

धातुई यथार्थ के बीच

तरल वास्त्विकाताओं की तरह

उभरते हैं,

गणितज्ञ और धर्माचार्य

ज्योतिषी और डाकू.

सिर्फ जोश और कविता,

सिर्फ प्रेम और स्मृति ही दृष्टि देती है,

न कि यह कुत्तागिरी

न ही सामान्य राहगीरी.

न ही यह भूलभुलैया.

यह मैं तभी तक मानता रहा जब तक

मेरी आत्मा मेरे दिल से पसीज नहीं गयी थी.

यह सच है कि यह बीमार मानसिकता थी,

लेकिन फिर भी जिन्दादिली इसी में थी.

उदय शंकर द्वारा अनुदित ये कवितायें लोरा हेल्ली के अंग्रेजी अनुवादों पर आधृत हैं.

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