वेलरियन ब्रौव्चेक: प्रगीत विधा का जीनियस फ़िल्मकार

By उदय शंकर 

(यहाँ फ़िल्मकार का कोई मूल्यांकन करने या या उसके फिल्मों को विश्लेषित करने की कोशिश नहीं की गई है। बल्कि एक ऐसे फ़िल्मकार को जिसे भारी उपेक्षा और एक स्तर की बदनामी झेलनी पड़ी उसको याद करने भर की कोशिश है। अभी उसकी फिल्मों को ठीक से पुनर्संयोजित भी नहीं किया जा सका है। अधिकांश फिल्में प्रोड्यूसर के गोदाम में पड़ी बर्बाद हो रही हैं। इधर कुछ जागरूकता बढ़ी है और लोगों ने खोज-खबर लेनी शुरू की है। देखते हैं कितना कुछ बचाया जा सकता है।  लेकिम एक ‘फतवा ‘तो दिया ही जा सकता है कि वेलरियन ब्रौव्चेक जैसा ‘हुनरमंद ‘यूरोपीय सिनेमा के इतिहास में न के बराबर हुये हैं। निम्नलिखित टेक्स्ट के बाद उसकी  शॉर्ट फिल्मों के  कुछ लिंक भी दिये जा रहे हैं। )

walerian Borowczyk

walerian Borowczyk

 एक जीनियस फ़िल्मकार कैसे ताउम्र एक ‘पोर्नोग्राफर’ फ़िल्मकार का खिताब ढोता रहा, उसका एक अद्भुत उदाहरण है- वेलरियन ब्रौव्चेक। वह इस तमगे से कैसे पीड़ित रहा होगा, हम इसकी सिर्फ कल्पना कर सकते हैं क्योंकि इस बावत उसका कोई रक्षात्मक बयान भी सामने नहीं आता है। हालांकि उसके बड़े कैनवास की फिल्मों को ही लोग सिर्फ देखते रहे और आलोचित करते रहे। लेकिन इसमें भी सच्चाई नहीं है। जिस न्यूडिटी को बर्गमैन जैसे फिलकार एक आध्यात्मिक दिव्यता के साथ प्रस्तुत करते हैं, उसी दिव्य-दृष्टि की ‘हिंसक अन्तर्रात्मा’ को पूरी नग्नता के साथ बेलौस होकर वेलरियन ब्रौव्चेक अपनी फिल्मों में प्रस्तुत करता है। यूरोपीय सिनेमा (सोवियत ब्लॉक) का अतिप्रचारित बहुलांश ईसाइत से अनुप्राणित आध्यात्मिक संवेगो से चालित चालाक राजनीतिक फिल्में हैं। इन फिल्मकारों की कम से कम तीन बिंदुओं के आस-पास सहमति थी। मैंने कहीं और भी लिखा था, उसे यहाँ भी दुहराना आवश्यक है-

  • उनमें एक सोवियत विरोधी टोन हमेशा मौजूद है।
  • ईसाइयत-घटाटोप से लैस एक तरह की आध्यात्मिकता भी अधिकांश में आभासित होती रहती है।
  • इनमें म्यूजिक-कंपोजर की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है, जिनके ऊपर पश्चिमी -संगीत का व्यापक असर है क्योंकि ‘अभिजात’ अवसाद बिना इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक और सिंथेसाइज़र के भरा-पूरा नहीं लगता है।

इन विशेषताओं को एक-एक फिल्मकारों के लिए हम सामान्यकृत भले नहीं कर पाएं लेकिन इनके कारण जो एक भरा-पूरा माहौल बनता है उसकी सामान्य विशेषताओं में मैं इन्हें जरुर पाता हूँ।

इस मायने में वेलरियन ब्रौव्चेक एक सीधा-साधा और नीडर फ़िल्मकार था। राजनीति उसे उतनी ही आती थी जितना किसी भी सामान्य प्रगतिशील इंसान को आती है। उसकी राजनीति के दो बिंदुओं को कोई भी बहुत ही स्पष्टता से पकड़ सकता है-

  • कैथॉलिक चर्च द्वारा सामाजिक जीवन को प्रभावित करने की जो धार्मिक राजनीति थी, उसका वह आजीवन घोर विरोधी रहा। कैथॉलिक चर्च का उतना बड़ा आलोचक यूरोपीय सिनेमा ने दूसरा कोई और नहीं दिया। उसकी फिल्मों में नग्नता का बहुलांश इसी विषय के इर्द-गिर्द वाली फिल्मों में दृष्टिगोचर होता है। क्योंकि आर्थिक संसाधनों पर जब से पूंजीवादी राज्य-शासन-प्रणाली का कब्जा हुआ है तब चर्च जैसी धार्मिक संस्थाएं सांस्कृतिक कार्यव्यवहारों तक सीमित हुयी हैं और उनके इस सांस्कृतिक पूंजी पर सबसे बड़ा हमला अक्सर प्रगतिशील/प्रेमिका महिलाएं करती रही हैं।
  • युद्ध की विभीषकाएँ, परमाणु बम का हमला और किसी भी तरह की सैनिक कार्यवाहियों का एक रचनात्मक विरोध उसकी फिल्मों की बड़ी विशेषता रही है।

  लेकिन जब इस राजनीति के इर्द-गिर्द वह रंग भरता था और उसको गति देता था तो कृष मार्कर जैसे बौद्धिक फ़िल्मकार को भी वह चकित कर देता था, खासकर छोटी फिल्मों में जहां उसकी कला अपने चरम को छू जाती है। उसकी फिल्मों से बौद्धिक उत्तेजना कितनी मिलती है यह बताना पेशेवर बौद्धिकों का काम है। लेकिन हम इतना जरूर कह सकते हैं कि भावना की तारों को  झनझनाने वाले फ़िल्मकार रेयर ही हुये हैं और उसमें वेलरियन ब्रौव्चेक का नाम सबसे पहले सम्मान के साथ लिया जाना चाहिए। कृष मार्कर जैसे बौद्धिक फ़िल्मकार के साथ उसकी दोस्ती मूलतः बुद्धि और भावना का ही योग है। अकारण नहीं है कि पोलैंड से फ्रांस आ जाने के बाद उसने पहली फिल्म Les Astronautes(1959) कृष मार्कर के साथ बनायी। वेलरियन ब्रौव्चेक के प्रति सोवियत संघ कोई उदार था, यह नहीं कह सकते हैंक्योंकि उसकी फिल्म Goto – Island of Love(1968) कम्युनिस्ट पोलैंड में प्रतिबंधित हो चुकी थीं। लेकिन, अभी तक के अवलोकन से मुझे नहीं लगता है कि उसकी फिल्मों का टोन सोवियत विरोधी रहा है। जैसा की मैंने पहले भी कहा कि वह सीधा-साधा कलाकार था और  लेफ्ट बैंक के फ़िल्मकार कृष मार्कर की अपेक्षा बहुत ही कम राजनीतिक था फिर भी उसका मित्र था। लेफ्ट बैंक की फिल्मों को प्रोड्यूस करने वाले ARGO ने उसकी फिल्मों को प्रोड्यूस किया। वह पेंटिंग, लिथोग्राफी, पोस्टर मेकिंग, कॉमिक्स-राइटिंग में निष्णात था। इसलिए वह छोटे कैनवास की फिल्मों का उस्ताद था। जैसे कृष मार्कर की बौद्धिक डाक्यूमेंट्री फिल्मों की विधा को निबंध/लेख कहा जाता है, वैसे ही वेलरियन ब्रौव्चेक की छोटी फिल्मों को प्रगीत की संज्ञा दी जा सकती है, सुगठित और अपनी मारक-क्षमता में अचूक, लिरिकल फिल्में।

The Astronauts (1959) का एक दृश्य

The Astronauts (1959) का एक दृश्य

Once Upon a Time (1957)

Dom(1958)

School (1959)

The Astronauts (1959)

Renaissance(1963)

Games of Angles (1964)

Theater of Mr and Mrs Kabal(1967)

Une Collection Particuliere (973)

  जारी…..

 उदय शंकर

उदय शंकर

जेएनयू से पीएचडी के लिए शोधरत। तीन खंडों में आलोचक सुरेंद्र चौधरी के रचना संचयन का संपादन। सांस्‍कृतिक आंदोलनों से जुड़ाव। उनसे udayshankar151@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

 

 

 

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